Saturday, October 24, 2009
भारत में मंहगाई और गरीब जनता
भारत में मंहगाई लगातार बदती जा रही है .और गरीबो की संख्या में भी लगातार वृद्धि होती जा रही है । लेकिन इस मंहगाई को रोकने के ज़रूरी कदम नही उठाये जा रहे है .इस मंहगाई को विकास से जोड़ा जा रहा है । में नही मानता कि विकास से कोई सम्बन्ध है.आज विज्ञापनो में ही करोणों बहाए जा रहे है.घटिया उत्पादों को विज्ञापन के जरिये बेचा जा रहा है.भारत में जब तक गरीबो कि संख्या बढती जायेगी में नही समझता कि विकास कि गति भी बढ़ पायेगी .और तो और इस देश के बुद्धिजीवी वर्ग भी इस महगाई कीतरफ ध्यानआकर्षित नहीं कर रहा है। इस मध्यम वर्ग व् बुद्धिजीवी वर्ग को भी सब कुछ मिल रहा है आज वह कारो में घूम रहा है । और ठाट से खा रहा है उसे इस मंहगाई से क्या लेना देना । ये देश के नेता भी वातानुकूलित कारों व् बंगलो में रह रहे है । उन्हें तो इस देश से कोई वास्ता नही रहा है । एक बार जीत जाने के बाद वो संसद व् जनता के बीच गायब हो जाते है और न जाने किस अय्याशी में डूबे रहते है? । इन सांसदों को सांसदनिधि दी जाती है उसे भी वो विकास पर खर्च नही कर पाते है. और एक दूसरे पर दोषारोपण करते रहने में व्यस्त है . एसा लगता कि इस देश के नेताओ से इंसानियत नाम की चीज गायब हो गयी है .जब तक ये नेता नहीं सुधरेंगे तब तक इन उच्च अधिकारियो व् कर्मचारियों पर भी नियंत्रण नहीं हो पायेगा । और जब तक इस देश के शिक्षितलोग इंसानियत का व्यव्हार नहीं करते तब तक इस आम जनता पर भी कोई अच्छा असर नहीं होने वाला है क्योकि एक कहावत है की यथा राजा तथा प्रजा .जनता भी इन उच्च शिक्षित लोगो के व्यव्हार से ही सीखती है । गरीब जनता के पास न तो पड़ने व् बच्चो को पढाने के लिए पैसा है और न ही ठीक से खाने व् कपड़े पहिनने के लिए. लोग सिर्फ पैसो की तरफ भागे जा रहे है और अपनी विवेक का इस्तेमाल नहीं कर रहे है । क्या पैसा ही सिर्फ यही मानव की जरूरत है .जरा सोचो ये मानव जन्म किसलिए मिला है.जरा ये भी सोचो मानव जाती का विकास एक दूसरे के सहयोग से ही हो पा हो पाया है और कितने हजारो वर्ष लग गए इन कारों व् वातानुकूलन तक लिए .कितनो ने ही अपनी जान की कुर्बानी दी है.जरा सोचो की आप कोई यहा १००० वर्षो के जीने के लिए तो आए नहीं इस धरती पर । क्यो न हम इस छोटे से जीवन में इंसानियत सीख्लें .और गरीबो व् आमिरो को साथ लेकर चलें .और गरीबो का भी ख्याल रखें .मदर टेरेसा ने ठीक ही कहा है की इन गरीब लोगो को रोटी से ज्यादा प्यार व सहानुभूति की जरूरत है.
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3 comments:
चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है.
मेरी शुभकामनाएं.
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दोस्ती और दोस्ती का बदलता यथार्थ- friends with benefits- बहस-९ [उल्टा तीर]
आप का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, हमने नया चिटठा "चर्चा पान की दुकान पर" प्राम्भ किया है, चिट्ठे पर आपका स्वागत है.
फिर भी मेरा भारत महान
स्वागत है । लिखते रहें ।
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